पिछले कई दशकों से काँग्रेस बिहार की गद्दी हासिल करने की कोशिश लगी हुई है, लेकिन 1990 के बाद काँग्रेस प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं बन पाई।
पिछले कई वर्षों से काँग्रेस बिहार मे राष्ट्रीय जनता दल के जूनियर सहयोगी के तौर पर काम कर रही है। बिहार मे काँग्रेस एक समय काफी लोकप्रिय, यूं कहे की पूरे देश मे लेकिन आज भारतीय जनता पार्टी ने वो लोकप्रियता हासिल कर ली है।
बुधवार को बिहार बंद की अगुवाई मे काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पटना पहुचे थे।
राहुल गांधी बिहार विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष आरजेडी नेता, मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव के साथ एक खुली गाड़ी मे सवार होकर पटना की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतरे, इस गाड़ी पर बिहार के काँग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, बिहार काँग्रेस यूनिट के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा भी थे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ चर्चित नेता देरी से रैली मे पहुचे, जैसे की काँग्रेस के युवा नेता कनहिया कुमार और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव लेकिन जब ये दोनों नेता भी खुली गाड़ी पर चड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हे रोक दिया हालांकि दोनों ने 2 से 3 दफा ऊपर जाने की कोशिश की लेकिन नाकामयाब रहे वही भीड़ मे किसी ने अपने फोन मे ये तस्वीरे कैद कर ली और सोशल मीडिया पर डाल दिया।
कई लोग इसे अपमान कह रहे है, और कुछ लोगों ने तो ये कह दिया की ये सब आरजेडी की शाजिश है, तेजस्वी यादव ने ही करवाया है, एक इंटरव्यू मे पप्पू यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा “तेजस्वी यादव कोन होता है हमको रोकने वाला, मेरा पावर बहुत है। लोगों ने अपने जोर से अटकले लगानी शुरू कर दी, जनसुराज पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा की ये सब दवाब बनाने के लिए किया गया हैकांग्रेस कार्य समिति के सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और विधान परिषद में कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. मदनमोहन झा को भी मंच पर जगह मिली थी।
राजद नेताओं में तेजस्वी यादव के अलावा प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल और राज्यसभा सदस्य संजय यादव भी मंच पर थे।
महागठबंधन के घटक दलों में भाकपा महासचिव डी राजा, भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्या, माकपा महासचिव एमए बेबी और विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को भी मंच पर जगह मिली।


