नई दिल्ली। अगर आप आने वाले समय में रेल यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। रेल मंत्रालय ने ट्रेन किराये में बढ़ोतरी का अंतिम निर्णय ले लिया है, और यह नई दरें जुलाई माह से लागू कर दी जाएंगी। किराए में यह संशोधन विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रभावित करेगा। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, 500 किलोमीटर से कम की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पुराने किराये में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन यदि कोई यात्री 500 किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी तय करता है, तो उसे अब अधिक किराया देना होगा।नॉन-एसी (साधारण श्रेणी) में यात्रियों को 5 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को 10 रुपये अधिक चुकाने होंगे। यह वृद्धि भले ही प्रतीकात्मक लगे, लेकिन इससे सालाना लाखों यात्रियों को प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।

रेल मंत्रालय ने किराया बढ़ाने के पीछे परिचालन लागत में वृद्धि और बढ़ते मेंटेनेंस खर्च को कारण बताया है। अधिकारियों का कहना है कि डीजल, बिजली, कर्मचारियों के वेतन और रखरखाव से जुड़ी लागतों में निरंतर इज़ाफा हो रहा है, जिसे देखते हुए किराये में “संतुलित और न्यूनतम वृद्धि” की गई है। रेलवे ने यह भी कहा कि इस निर्णय में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसलिए केवल लंबी दूरी की यात्राओं के लिए ही यह वृद्धि लागू की गई है। इस मामूली किराया बढ़ोतरी से भारतीय रेलवे को सालाना लगभग 7,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है। यह राशि रेलवे के बुनियादी ढांचे, नई सुविधाओं और ट्रेन सेवाओं के आधुनिकीकरण में उपयोग की जा सकती है।
हालांकि किराया वृद्धि सीमित और न्यूनतम है, फिर भी कुछ यात्रियों ने इस पर नाराजगी जताई है। यात्रियों का कहना है कि मूलभूत सुविधाएं जैसे साफ-सफाई, समय पर ट्रेन संचालन और खानपान की गुणवत्ता अभी भी कई रूटों पर उम्मीद के अनुसार नहीं हैं। ऐसे में किराया बढ़ाना आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। भारतीय रेलवे की ओर से यह किराया वृद्धि एक आर्थिक आवश्यकतानुसार उठाया गया कदम है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि रेलवे को अब यात्रियों की सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार करना होगा। यात्रियों को उम्मीद है कि अगर किराया बढ़ रहा है, तो बदले में सेवा में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।


